बिहार के बेगूसराय में महेन्द्र सिंह धोनी पर FIR, जाने क्या है पूरा मामला

बिहार के बेगूसराय में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी समेत 8 पर शिकायत दर्ज कराई गई है। मामला चेक बाउंस से जुड़ा है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 28 जून को होगी।

FIR against Mahendra Singh Dhoni in Begusarai
महेंद्र सिंह धोनी के खिलाफ एफआईआर

बिहार : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (महेंद्र सिंह धोनी के खिलाफ प्राथमिकी) समेत आठ लोगों के खिलाफ बिहार के बेगूसराय सीजेएम कोर्ट में मामला दर्ज किया गया है। यह मामला उत्पाद का सीएनएफ देकर 30 लाख के चेक बाउंस होने और फिर उसे लौटाने का है। बताया जा रहा है कि धोनी उस प्रोडक्ट का प्रमोशन कर रहे हैं और कंपनी के चेयरमैन भी हैं।

चेक बाउंस का बताया मामला: DS Enterprises (DS) Enterprises ने बेगूसराय CJM कोर्ट में यह केस दायर किया है। सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार मिश्रा की अदालत में भेज दिया, जहां मामले की अगली सुनवाई 28 जून को होगी।

बेगूसराय सीजेएम कोर्टधोनी समेत 8 के खिलाफ एफआईआर: इस मामले में शिकायतकर्ता नीरज कुमार निराला ने बेगूसराय कोर्ट ऑफ जस्टिस, न्यू ग्लोबल प्रोड्यूसर इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रंपा कुमारी की अदालत में कंपनी के चेयरमैन महेंद्र सिंह धोनी, सीईओ राजेश आर्य, निदेशक न्यायालय (लेखा प्रशासन) महेंद्र सिंह, विपणन प्रमुख अर्पित दुबे, एडी इमरान बिन जफर, विपणन प्रबंधक वंदना आनंद और विपणन राज्य प्रमुख बिहार अजय कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 120 (बी) और धारा 138 के तहत एनआई अधिनियम में शिकायत पत्र दाखिल किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मामले में शिकायतकर्ता डीएस इंटरप्राइजेज के मालिक नीरज कुमार निराला का आरोप है कि 2021 में उन्होंने न्यू ग्लोबल अपग्रेड इंडिया लिमिटेड का सीएनएफ लिया। सीएनएफ लेने के लिए कंपनी को 36 लाख 86 हजार रुपये दिए गए और कंपनी ने शिकायतकर्ता को खाद भेजी। लेकिन कंपनी के असहयोग के कारण खाद बेचने में दिक्कत आ रही थी. इसी बात को लेकर शिकायतकर्ता और कंपनी के बीच विवाद शुरू हो गया। जिसके बाद कंपनी ने 30 लाख का चेक देकर सारी खाद वापस कर दी। लेकिन, बैंक खाते में पैसे नहीं होने के कारण कंपनी द्वारा दिया गया चेक बाउंस हो गया। जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा गया। लेकिन उसकी ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर शिकायतकर्ता ने सभी आरोपियों और कंपनी के खिलाफ कोर्ट में मामला दर्ज कराया।

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