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Haathi Mere Saathi: राणा दग्गूबटी ने किया खुलासा- बाहुबली के भल्लाल देव के बाद क्यों बने वनदेव?

फ़िल्म की ग्लोबल अपील पर राणा कहते हैं मैंने जो महसूस किया वो यह है कि हाथी जानवर और प्रकृति से हम से इस कदर जुड़े हुए हैं कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप देश के किस हिस्से में रहते हैं।…

नई दिल्ली, जेएनएन। बाहुबली और द ग़ाज़ी अटैक के बाद तेलुगु सुपरस्टार राणा दग्गूबटी हाथी मेरे साथी के साथ एक बार फिर हिंदी दर्शकों के बीच लौट रहे हैं। यह फ़िल्म तीन भाषाओं में रिलीज़ हो रही है। तेलुगु में अरण्य, तमिल में कादान और हिंदी में हाथी मेरे साथी के नाम से 26 मार्च को सिनेमाघरों में आएगी। अब जागरण डॉट कॉम को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी में राणा ने उस वजह का खुलासा किया है, जिसके चलते वो इस फ़िल्म को करने के लिए तैयार हुए थे। 

‘हाथी मेरे साथी’ किसी भी कलाकार के लिए मुश्किल फ़िल्म है। इस एडवेंचर ड्रामा के लिए ऐसे अभिनेता की ज़रूरत थी, जो पूरा एक साल फ़िल्म को समर्पित कर सके, क्योंकि इसके लिए अभिनेता को हाथियों के साथ प्रशिक्षण लेना था। साथ ही ऐसी लोकेशंस में शूट करना था, जो मानव जीवन से दूर हैं। साथ ही वनदेव के किरदार के लिए भारी शारीरिक बदलाव की दरकार थी और बॉडी लैंग्वेज पर भी काम करने की जरूरत थी।

इस बारे में राणा ने बताया- “हाथी मेरे साथी की कहानी निर्देशक प्रभु सोलोमन के दिमाग की उपज है। अगर आप तमिल में उनकी कुछ फ़िल्में मसलन जैसे कुमकी और मयना देखें समझ जाएंगे कि  वो जंगल के कितने नज़दीक हैं। प्रभु एक बड़ी फिल्म बनाना चाहते थे जो एडवेंचरस हो और जिसमें हाथियों की भूमिका अहम हो। यह फ़िल्म एक ऐसे मुद्दे को रेखांकित करती है, जो मेरे बहुत क़रीब है। इरोस और वो, मेरे लिए यह फ़िल्म लेकर आए।” 

राणा ने इस त्रिभाषी फ़िल्म के लिए अपने डेडिकेशन पर कहा- “बाहुबली के बाद, मैंने सोचा- अब मैं क्या करूं?” मेरे लिए, वनदेव एक महान चरित्र था, क्योंकि वह एक ऐसा व्यक्ति था, जो हाथियों के लिए लड़ रहा था, जंगल के लिए लड़ रहा था। जब मैंने पहली बार कहानी सुनी, तो यह मोगली के बड़े संस्करण की तरह लगा। अगर मोगली बड़ा हो जाता और उसे समाज से कोई समस्या होती, तो वह क्या करता? ” 

फ़िल्म की ग्लोबल अपील पर राणा कहते हैं, “मैंने जो महसूस किया, वो यह है कि हाथी, जानवर और प्रकृति से हम से इस कदर जुड़े हुए हैं कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप देश के किस हिस्से में रहते हैं। इसलिए यह इसे राष्ट्रीय फ़िल्म के रूप में देखा जाना चाहिए।” 

राणा ने फ़िल्म के संदेश को लेकर कहा,”हम एक ऐसे समय में रह रहे हैं, जहां हम इस बात से अवगत हैं कि कैसे वातावरण में बदलाव होता है और हमें कैसे सावधान रहने और सही काम करने की आवश्यकता है। इसलिए यह सही मायने में एडवेंचरस फिल्म होने के साथ ऐसा मैसेज साझा करती है, जो वाकई अहम है।” हाथी मेरे साथी में पुलकित सम्राट, ज़ोया हुसैन और श्रिया पिलगांवकर भी अहम किरदारों में दिखेंगे। Source : Jagran

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