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Mirabai Chanu: देश को मैडल दिलाने वाली मीराबाई चानू की कहानी प्रेरणादायक, लकड़ी बीनने शुरू हुआ था सफर

टोक्यो ओलंपिक २०२० को लेकर देश में आज खुशी का माहौल है, क्योंकि आज देश के नाम पहले मेडल की शुरुआत हो चुकी है। देश के तमाम राजनेता, स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी से लेकर एक्टर तक अपनी खुशी सोशल मीडिया पर जाहिर कर रहे हैं। वहीं ओलंपिक में प्रथम मेडल लाने वाली 26 वर्षीय मीराबाई चानू के घर की तस्वीरें व वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इधर उनके गांव के लोग भी लाइव प्रतियोगिता देख रहे हैं।

देश के नाम पहले मेडल की खुशी जाहिर करते हुए पूर्व भारतीय विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अपने चित परिचित अंदाज में यह पोस्ट लिखा है कि “भारतीय नारी सब पर भारी”! इसी तरह महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी खुशी जाहिर की है। इधर खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर मीराबाई को बधाई दी है और देश के नाम मेडल पाने के लिए खुशी व्यक्त की है। पहले दिन देश के नाम पहला मेडल हासिल करने वाली वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने आज देश का नाम ऊंचा किया है।

वर्ष 1994 में जन्मी मणिपुर के नोंगपेक काकचिंग गांव की रहने वाली मीराबाई एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। बचपन में उनकी इच्छा तीरंदाज बनने की थी लेकिन आठवीं कक्षा में किताब के एक चैप्टर में वेटलिफ्टर कुंज रानी के बारे में जानने के बाद उनकी रुचि बदल गई।

आपको बता दें कि वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को बचपन से ही गरीब होने के कारण संघर्ष करना पड़ा। बचपन के दिनों में पहाड़ों से जलावन की लकड़ी का बोझ उठाकर लाने के कारण उनके शरीर में मजबूती आ चुकी थी और बचपन से ही उन्हें भारी वजन उठाने की आदत हो चुकी थी।

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