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Success Story: जानिए सृष्टि जयंत देशमुख की कहानी, कैसे बनी प्राइमरी स्कूल टीचर की बेटी यूपीएससी टॉपर..

Success Story जानिए सृष्टि जयंत देशमुख की कहानी, कैसे बनी प्राइमरी स्कूल टीचर की बेटी यूपीएससी टॉपर

किसी भी इंसान के जीवन का एक सपना होता है। अपना एवं अपने माता-पिता का नाम रौशन करना इसके लिए वह जीतोड़ कोशिश बह करता है।आज तक हम सभी ने ऐसे कई IPS और IAS की कहानी सुनी-पढ़ी है, जिन्होंने कठिन मेहनत और कई सारी चुनौतियों का सामना कर के इस पद को हासिल किया है। इसके अलावा भी कई ऐसी कहानियाँ सुनी है जिसमे देश के सैनिकों, पुलिस की बहादुरी की किससे होते है। वैसे भी यूपीएससी की परीक्षा को देश की सबसे कठिनतम परीक्षाओं में से एक मन जाता है। इसके लिए परीक्षार्थी बेहद कठिन एक दृढ़ इच्छाशक्ति वाला होना चाहिए जो एक सुदृढ़ रणनीति एवं मेहनत के बल पर अपनी सटीक राणनीति के बदौलत इस कठिन परीक्षा को पास कर सके।

किसी भी सरकारी दफ्तर में बड़े साहब के एक हस्ताक्षर के लिए दर-दर की ठोकरें खाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह एक ऐसी हकीकत है जिससे हम सभी कभी-न-कभी दो-चार हुए ही होंगे चाहे कोई भी प्रमाण पत्र बनाना हो , सहमति लेनी हो या फिर किसी अन्य कागजात पर अफसरों या कर्मचारियों की आवश्यकता हो लोगों को बेवजह इधर-उधर भटकना पड़ता है। नौकरशाही हर जगह अपना प्रभाव बनाए हुए है।

आज हम जानते है सृष्टि जयंत देशमुख की कहानी जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम के जरिये बिना किसी कोचिंग के अपनी सेल्फ स्टडी के बदौलत इस कठिन परीक्षा को पास कर के न सिर्फ दिखाया बल्कि टॉप कर के भी दिखाया है। यहाँ बात हो रही है मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कस्तूरबा इलाके की रहने वाली सृष्टि जयंत देशमुख की, जो एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती है । इनके पिता जयंत देशमुख प्राइवेट कंपनी में बतौर इंजीनियर कार्यत है वही माता सुनीता देशमुख प्राइमरी स्कूल टीचर है।

परिवार में पढ़ाई का रुझान शुरू से ही था इसलिए सृष्टि को पढ़ने की कोशिश बचपन से ही उनके माता-पिता ने की,इंसान के जीवन में उसके आदर्श उसके माता-पिता ही होते है। ये दोनों ही इंसान की जिंदगी को बेहतर बनाने का कार्य करते है खासकर पिता की भूमिका बेहद अहम् होती है। एक पिता अपनी संतान को हर संकट से दूर बहुत नाजों से पालता है।साथ ही, उसके लिए कई सपने देखता है। सृष्टि की शुरुवाती पढ़ाई भोपाल के कार्मेल स्कूल से हुई है। बचपन से ही वो पढाई में काफी अच्छी थी। उन्होंने 12वीं क्लास में 93 फीसदी अंक हासिल किये थे।

सृष्टि ने अपंने साक्षातकार में बताया की वो इंजीनियरिंग की पढाई के दौरान ही निश्चित कर चूँकि थी की उन्हें क्या करना है उन्हें इंजीनियरिंग के बाद एक सामान्य जीवन जीना कुछ सही नहीं लग रहा था इसलिए उन्होंने साल 2018 में केमिकल इंजीनियरिंग की परीक्षा के साथ यूपीएससी की भी तैयारी में पुरे तन-मन से लग गयी। सबसे कमल की बात तो ये रही की सृष्टि ने दोनों ही परीक्षाओं में बजी भी मार ली।

बकौल सृष्टि जहाँ पूरी दुनिया पढ़ाई के मामले में इंटरनेट को एक अभिशाप के तौर पर देखती है वे वरदान मानती है। हालाँकि वो ये कहती है की इंटरनेट मार्ग भटका सकता है पर अगर आपके अंदर जूनून है कुछ पाने के तो फिर ये आपके ध्यान को कभी भी नहीं भटका सकता। पढ़ाई के दौरान अपने सभी सोशल एकाउंट्स को सृष्टि ने बंद कर दिया था, इंटरनेट सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई के लिए ही उपयोग करती थी। पर अब सृष्टि न सिर्फ अपनी सोशल मिडिया पोस्ट को लेकर छाई रहती है। फ़िलहाल सोशल मिडिया पर उनके 9.5 लाख से भी ज्यादा फॉलोवर्स है।

सृष्टि के अनुसार यूपीएससी का सिलेबस काफी विस्तृत है इसलिए उनके अनुसार पढ़ाई सिमित और सटीक करनी चाहिए वो भी पूरी रणनीति के साथ। सृष्टि ने पिछले कुछ सालों के सवालों पर जमकर प्रैक्टिस की और इसके अलावा एनसीआरटी की किताबो का एक नोट्स भी तैयार किया। अपनी कड़ी मेहनत, लगन और सटीक रणनीति के बदौलत सृष्टि ने यूपीएससी में न सिर्फ सफलता अर्जित की बल्कि साल 2018 में अपने पहले ही प्रयास में अर्जित की साथ ही वे टॉपर भी बनी उन्हें 5वी रैंक हासिल हुई और महिलाओं में अव्वल स्थान अर्जित किया उनकी इस कामयाबी पर न सिर्फ उनके माता-पिता बल्कि सभी प्रियजन बेहद खुश हुए। साल 2019 में उन्हें मध्यप्रदेश कैडर मिला फ़िलहाल वे मध्य प्रदेश में ही कार्यत है।

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