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पिता कैप्टन और पुत्र सिद्धू के रिश्ते में जमी बर्फ को क्या चाय की प्याली की गर्मी पिघला पाएगी ।

नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा लंबे प्रयासों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर ताजपोशी हो चुकी है। कैप्टन के पास जन भावना को बनाए रखने के लिए कांग्रेस हाई कमान द्वारा 18 सूत्रीय एजेंडा रखा गया है और नवजोत सिंह सिद्धू इसे पूरा करवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद एक शीत युद्ध छिड़ गया था ,जो अभी थोड़ा थमा नजर आ रहा है। अभी यह कहना सही नहीं होगा की इस युद्ध की समाप्ति हो गई है। इतना अवश्य है कि नवजोत सिंह सिद्धू कैप्टन अमरिंदर सिंह को कभी पिता के समान संज्ञा दे चुके है इसीलिए सिद्धू के स्वाभिमान की जीत हुई। अतः कहा जा सकता है कि कैप्टन अमरिंदर की जिद नवजोत सिंह सिद्धू के स्वाभिमान के आगे बौना सा प्रतीत हुआ। नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच कुछ साल पहले जिस तरह से मनमुटाव शुरू हुई, उसका पल भर में खात्मा होना आसान बात नहीं है। दो लोगों के बीच यह जंग ऐसी बर्फ बिल्कुल नहीं है जो चाय के प्याले की गर्मी से पिघल सके।

कैप्टन और सिद्धू के बीच टकराव की नई पटकथा की शुरुआत
नवजोत सिंह सिद्धू के प्रयासों के फल स्वरूप कांग्रेस अध्यक्ष पद पर ताजपोशी की जा चुकी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास जन भावना को बनाए रखने के लिए कांग्रेस हाईकमान द्वारा 18 सूत्रीय एजेंडा का प्रस्ताव रखा गया है जिसे पूरा करवाने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू पूरी तरह से तत्पर है। ताजपोशी के दौरान दिए गए भाषण में नवजोत सिंह सिद्धू ने यह कहा है कि वह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से 18 सूत्रीय एजेंडे को हर हाल में लागू करवाएंगे, सिद्धू ने इसके लिए अध्यक्ष पद संभालते ही मुख्यमंत्री पर दबाव डालना शुरू कर दिया है।

एक ओर कैप्टन अमरिंदर सिंह से माफी मांगे बिना ही अध्यक्ष पद का ताज पहन चुके सिद्धू ने कांग्रेस भवन में अपना बिस्तर लगाने का भी ऐलान किया है। साथ ही मंत्रियों को भी वहां 3 घंटे का समय देने की बात कही है। इस संबंध में कुछ जानकारों का कहना है कि इससे कैप्टन और सिद्धू के बीच की टकराव और बढ़ सकती है। अतः कह सकते हैं कि पंजाब की राजनीति के इतिहास में पंजाब कांग्रेस को लेकर एक नई पटकथा लिखे जाने की भूमिका तैयार हो चुकी है। .

भाजपा छोड़कर कांग्रेस तक पहुंचने का सफर
पंजाब के नवनियुक्त अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर से वर्ष 2004 से 2014 तक लोकसभा सांसद थे। वह साल 2014 में अमृतसर से टिकट काटे जाने के संबंध में भाजपा से नाराज थे। जबकि मोदी सरकार ने 22 अप्रैल 2016 को उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत कर दिया था। लेकिन उन्होंने 26 अप्रैल को शपथ लेने के बाद 18 जुलाई 2016 को राज्य सभा से इस्तीफा दे दिया। भाजपा के प्रति उनकी नाराजगी इतनी अधिक थी कि कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को 14 सितंबर 2016 को अपना इस्तीफा भेज दिया।

साथ ही, उनकी पत्नी व पूर्व विधायक नवजोत कौर ने भी भाजपा से 8 अक्टूबर 2016 को इस्तीफा दे दिया था। जब साल 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक थे उस समय ये दोनों पंजाब में अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाशने में लगे थे। इसी क्रम में वह आम आदमी पार्टी के संपर्क में आए और यह अटकले लगाई गई कि सिद्धू आम आदमी पार्टी में शामिल होकर पंजाब के अगले सीएम बन सकते हैं। बताया जाता है कि समय बीत रहा था। यह बात सिरे नहीं चढ़ी। आवाज -ए- पंजाब सिद्धू चौथे मोर्चे की भी तैयारी में थे। लेकिन कहीं भी बात नहीं बन पा रही थी।

सिंधु के कांग्रेस में प्रवेश
वर्ष 2016 के अक्टूबर महीने में पंजाब में यह अफवाह फैलने लगी कि सिद्धू कांग्रेस आलाकमान के संपर्क में है और कांग्रेस में आने के बाद डिप्टी सीएम के पद की मांग कर रहे हैं। इसी समय राहुल गांधी से हुए उनकी कई मुलाकातों की चर्चा भी हुई। उस समय कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब कांग्रेस के प्रधान थे। जब 28 नवंबर 2016 को सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर कांग्रेस में शामिल हो गई तो यह तय हो गया कि सिद्धू भी कांग्रेस में ही शामिल होंगे। यह भी कहा जा रहा था कि कॉग्रेस की सरकार बनने पर नवजोत सिंह सिद्धू डिप्टी सीएम के पद के लिए अडे हैं। इधर साल 2017 में विधानसभा चुनाव की तारीख 4 फरवरी घोषित हो चुकी थी।

10 जनवरी 2017 को डिप्टी सीएम बनने को लेकर उनकी मुश्किलें इतनी अधिक बढ़ चुकी थी कि कांग्रेस आलाकमान ने उनकी शर्तें मान ली थी। इसी बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 11 जनवरी 2017 को दावा किया कि कांग्रेस में सिद्धू के शामिल होने का फैसला बिना शर्त है। उन्होंने कहां की नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर के पूर्व विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। उसी समय राहुल गांधी की मौजूदगी में 15 जनवरी 2017 को सिद्धू ने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी।

कैप्टन की जिद और सिद्धू के स्वाभिमान की टकराव
विधानसभा चुनाव के नतीजे 11 मार्च को आ गए और उस चुनाव में भारी बहुमत से कॉन्ग्रेस की जीत हुई । 12 मार्च को सिद्धू के डिप्टी सीएम बनने वाली बात एक बार फिर से उठाई गई। 16 मार्च 2017 को शपथ ग्रहण समारोह का कार्यक्रम था। सिद्धू अमृतसर ईस्ट से चुनाव जीत कर आए थे। मीडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार डिप्टी सीएम के पद की मांग पर डटे सिद्धू ने यह कह कर अपनी दावेदारी जता दी कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

जबकि बाद में उन्होंने कहा की मैं राहुल की सेना का एक सैनिक हूं पंजाब की नई सरकार में मेरी भूमिका वही तय करेंगे। सिद्धू को डिप्टी सीएम का पद न दिए जाने को लेकर कैप्टन अमरिंदर ने आलाकमान को संतुष्ट कर दिया और उन्हें कैबिनेट रैंक देकर स्थानीय निकाय और पर्यटन मंत्रालय सौंप दिया गया। इस संदर्भ के बाद उनके बीच का वाद- विवाद दिन-ब-दिन गहरा होता चला गया। एक तरफ न तो पिता समान कैप्टन अमरिंदर सिंह का जिद हारने का नाम ले रहा था और वहीं दूसरी तरफ पुत्र समान सिद्धू का स्वाभिमान भी अडिग था।

विधानसभा में नवजोत सिद्धू सीएम की कुर्सी पर बैठ गए थे
कैप्टन और सिद्धू में कई बार विवाद हुए लेकिन दोनों एक दूसरे को पिता-पुत्र के रिश्ते का हवाला देते रहे, मतलब सरकार बनने के बाद हुए पहले विधानसभा सत्र में ही सीएम की कुर्सी पर अचानक नवजोत सिद्धू बैठ गए। यह पहली ऐसी घटना थी जो सिद्धू की महत्वकांक्षा को दर्शा रही थी और काफी दिनों तक चर्चा का विषय भी बनी रही।

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