शेखपुरा

चर्चा बरबीघा विधानसभा की

चूकि बिहार विधानसभा चुनाव की विसात अभी पूरी तरह विछ नहीं पाई हैं तो मालुम नहीं कि कौन सा प्यादा किधर जायेगा। हालांकि ऐसे संकेत जरूर मिलने लगे हैं कि मुक़ाबला बहुत दिल चस्प होने वाला हैं।  अरसे से दो चुनाव छोड़कर बरबीघा विधान सभा कांग्रेस का गढ़ रहा हैं।  2015 में भी महागठबंधन भी कांग्रेस पार्टी को सीट दे कर फिर से कांग्रेस को संजीवनी मिली ।

शिव कुमार 

वर्तमान कांग्रेसी विधायक सुद्रशन कुमार अपने पितामह स्व. राजो सिंह के पदचिन्हों पर चलते हुए विकास को मूलमंत्र मान कर दलिय बंधन लांघकर सरकार के द्वार डेरा डालें हुए हैं। विकास की एक लम्बी लक़ीर खींच मौन हो कर जनता की ओर मुख़ातिर हैं। 

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त्रिशूलधारी सिंह 

पूर्व विधायक गजानंद शाही उर्फ़ मुन्ना शाही तीर छाप झंडा, कांधे पर पीला गमछा ले कर हाथ की तरफ भी बार बार देख रहे हैं। सरकारी दल के जिला अध्यक्ष जो मूल निवासी बिहार के मुखिया जिला के हैं। नगर वार्ड चुनाव लड़ते लड़ते अब विधान सभा चुनाव लड़ने के तैयारी में हैं। 

गजानंद शाही  

सूत्रों से जानकारी मिल रहा हैं कि पार्टी कार्यकर्ता का हर तरह का पैरवी थाना से जिला अधिकारी तक खूब करते नहीं थक रहे हैं। 

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अंजनी कुमार 

पांच साल तक बरबीघा से कोसो दूर रह कर पूरा बिहार में नया पार्टी का प्रचार प्रसारकर थकने के बाद गली नाली के नाम पर धरना दे कर जनता के बीच में उपस्थिति दर्ज कराना चाह रहे हैं. इधर नगर सभापति की पिता भी तीसरी बार पुरे दम ख़म के साथ दो दो हाथ करने के लिए तैयार हैं। और भी महाशय हैं,फिलहालही नगर परिषद में बुरी तरह हार कर बंगला के सहारे विधानसभा पहुंचने का दिन में ही सपना देख कर मने मन खुश रह रहे हैं। अच्छी बात हैं कि जनता भी बहुत खुश हैं अब आएगा ऊट पहाड़ के नीचे। . 

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