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सूरजभान बढ़ा सकते हैं मोकामा में अनंत सिंह की मुश्किल, क्या इस बार किले को बचा पाएगी छोटी सरकार

शेखपुरा न्यूज़ : बिहार की राजनीति और बाहुबली का गहरा नाता है। पहले बाहुबली यहां नेताओं के लिए वोट बटोरते थे, अब बाहुबली खुद सम्माननीय होते जा रहे हैं।बिहार का मोकामा एक आदर्श उदाहरण है जहां बाहुबली अनंत सिंह 2005 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। यहां अनंत सिंह का सिक्का चलता है। यही वजह है कि जब लालू यादव ने उन्हें हराना चाहा तो उन्होंने जदयू के टिकट पर जीत हासिल की. जब जदयू ने उनका विरोध किया तो वह लालू यादव के साथ बैठक में पहुंचे। 2015 में बिहार के ये दो बड़े नेता उनके खिलाफ हो गए थे. फिर उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर अपनी ताकत दिखाई।

सूरजभान बढ़ा सकते हैं अनंत सिंह की मुश्किल

सूरजभान सिंह ने सोनम देवी को सपोर्ट करने की बात कही है. उन्होंने कहा – यह उपचुनाव तय करेगा कि मोकामा और गोपालगंज के लोग विकास चाहते हैं या नहीं। यह तय करेगा कि देश में शांति और विकास चाहने वालों का समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है और इसलिए मोकामा और गोपालगंज दोनों में सीटें कमल खिलना निश्चित है। सूरजभान सिंह मोकामा से विधायक रह चुके हैं. उन्होंने 2000 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को भारी बहुमत से हराया था। तब सूरजभान सिंह को करीब 77 हजार वोट मिले थे।

लेकिन इस बार अनंत सिंह के लिए सब कुछ इतना आसान नहीं है। पिछले कई चुनावों से अनंत सिंह को टक्कर दे रहे ललन सिंह इस बार बड़ी चुनौती देते नजर आ रहे हैं. यहां पद की लड़ाई तब और दिलचस्प हो गई है जब इलाके के तीसरे बाहुबली सूरजभान सिंह ने दस्तक दे दी है.

अनंत सिंह को दोषी ठहराए जाने के बाद उनके पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र मोकामा में इस बार लड़ाई इतनी आसान नहीं दिख रही है. अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी इस सीट से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। उनके सामने मशहूर प्रतिद्वंद्वी ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी हैं। वो ललन सिंह जो कभी उनसे महज दो हजार वोटों से पीछे थे.

2010 के विधानसभा चुनाव में सोनम देवी सीधे अनंत सिंह के खिलाफ खड़ी हुई थीं। इस चुनाव में जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह को 51560 वोट मिले थे, जबकि लोजपा प्रत्याशी सोनम देवी को 42610 वोट मिले थे. तब सूरजभान के छोटे भाई कन्हैया कुमार भी चुनाव लड़ रहे थे। इससे ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी वोटों के मामूली अंतर से हार गईं। कन्हैया कुमार इस बार मैदान में नहीं हैं. इसलिए इस साल का मुकाबला इलाके के तीसरे बाहुबली सूरजभान सिंह की वजह से दिलचस्प होने की उम्मीद है.

Source:दैनिक भास्कर

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