जब बुलेट से हार गया बैलेट का अपराजेय योद्धा, तीन दिन तक बंद रहा था शेखपुरा बाजार, पढ़ें राजो सिंह हत्याकांड की टाइमलाइन

2005 में अपराधियों ने राजो बाबू की हत्या कर दी थी। उनसे मिलने आए सरकारी कर्मचारी को भी मार दिया था। 16 साल बाद कोर्ट ने सबूत के अभाव में आरोपियों को रिहा कर दिया है। राजद नेता ने इसे सच की जीत बताया।

नौ सितंबर 2005 की शाम करीब सात बजे आजाद हिंद आश्रम में राजो बाबू की गोली मारकर हत्या की गई थी। राजो बाबू से मिलने आये एक सरकारी कर्मी की भी बदमाशों ने हत्या की थी। घटना के वक्त आजाद हिंद आश्रम में मौजूद उस समय कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शिवशंकर महतो ने छत से कूदकर अपनी जान बचाई थी। घटना के वक्त कहा गया कि एक बाइक पर सवार होकर तीन बदमाश आये और राजो बाबू के सीने में गोली मार दी। समीप से गोली चलाने के कारण घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई थी।

राजनीतिक गलियारे में उस समय जोरों की चर्चा थी कि समीप ही विधानसभा चुनाव होने वाला है और राजो बाबू के जीवित रहते किसी अन्य का जीतना नामुमकिन है। राजनीतिक नफा-नुकसान को लेकर ही उनकी हत्या की गई। हत्या से पहले राजो सिंह टाटी नरसंहार के भी आरोपी थे। कुछ लोगों का कहना था कि इसी नरसहांर का बदला लेने की नीयत से राजो बाबू की हत्या की गई। उनकी हत्या खबर फैलने के बाद शहर का बाजार पूरी तरह से बंद हो गया था। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया था। हत्या के बाद तीन दिन तक बाजार पूरी तरह से बंद रहा था। काफी दिनों बाद स्थिति सामान्य हो पाई थी। बैलेट के अपराजेय योद्धा कहे जाने वाले राजो बाबू को बुलेट से हारना पड़ा था।

Copy

कोर्ट के फैसले को बताया न्याय की जत

राजो सिंह हत्याकांड में जेल जाने वाले राजद नेता शंभु यादव और अनिल महतो ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य की जीत हुई है। दोनों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि घटना के दिन दोनों घर में थे। इसी दौरान अचानक पुलिस पुहंची और घर से दोनों को पकड़ लिया। शंभु यादव की गिरफ्तारी इंदायपर स्थित घर से हुई थी तो अनिल महतो को मनकौल में घर से गिरफ्तार किया गया था। दोनों नेताओं ने कहा कि राजो बाबू की हत्या के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं थी और राजनीतिक साजिश के तहत हमदोनों को जेल भेज दिया गया। देर से ही सही अंत में सत्य की जीत हुई। कोर्ट के फैसले के बाद शंभु यादव भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने देवघर रवाना हो गये।

राजो सिंह हत्याकांड का घटनाचक्र

1. 9 सितंबर 2005: राजो सिंह की हत्या
2. 9 सितंबर 2005: शंभु यादव और अनिल महतो की गिरफ्तारी
3. 23 जून 2007: शंभु यादव और अनिल महतो को जमानत
4. वर्ष 2007: हत्याकांड के प्राथमिक अभियुक्तों मंत्री अशोक चौधरी सहित 5 को एसपी अमित लोढ़ा की सुपरविजन रिपोर्ट में क्लीनचिट
5. वर्ष 2016: शंभु यादव सहित 5 आरोपियों पर कोर्ट में आरोप का गठन
6. वर्ष 2019: कोर्ट में गवाहों का बयान दर्ज
7. अप्रैल 28: सूचक सुदर्शन कुमार ने कोर्ट में केस लड़ने से किया इंकार
8. 3 जून 2022: कोर्ट ने सभी आरापियों को किया रिहा

source: हिन्दुस्तान

Facebook Comments Box