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2 घंटों के अंदर गम में बदल गई ममता की ख़ुशी, कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुनाया ऐसा फैसला की उड़ गए होश

सीबीआई ने रविवार को सुबह नारदा घूसकांड मामलें में टीएमसी के चार नेताओं ( दो मंत्री, एक विधायक, एक पूर्व मंत्री ) सुब्रत मुखर्जी, फिरहाद हाकिम, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया, गिरफ्तार कर कोलकाता स्थित सीबीआई दफ्तर ले जाया गया, यहां ममता बनर्जी भी अपने हजारों समर्थकों संग पहुँच गई और तुरंत रिहा करने की मांग करने लगीं, यही नहीं ममता ने कहा, हम सब को भी गिरफ्तार कर लो.

आख़िरकार अंत तक ममता बनर्जी डटी रही, इस दौरान बाहर खड़े उनके समर्थकों यानि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने सीआरपीएफ जवानों पर पत्थर भी फेंके, हालाँकि रात होते-होते टीएमसी के चारों नेताओं को 25 हजार के निजी मुचलके पर जमानत मिल गई. जमानत मिलने के बाद ममता समेत समस्त टीएमसी नेताओं/कायर्कर्ताओं में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी. लेकिन लगभग दो घंटे बाद ही ये ख़ुशी गम में बदल गई.

दरअसल टीएमसी के चारों नेताओं की जमानत के खिलाफ सीबीआई ने रात लगभग 11 बजे कोलकाता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी के चारों नेताओं की जमानत पर रोक लगा दी, अब मामलें की अगली सुनवाई बुधवार 19 मई को होगी तब तक टीएमसी के चारों आरोपी नेताओं को सीबीआई की हिरासत में ही रहना होगा। इससे पहले दिन में, गिरफ्तारी के तुरंत बाद, सैकड़ों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने शहर और पश्चिम बंगाल में अन्य जगहों पर लॉकडाउन के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए जमकर उत्पात मचाया। हैरानी की बात यह रही कि पुलिस उत्पातियों पर कोई एक्शन भी नहीं ले रही थी.

वहीँ पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल जगदीप धनखड ने कानून और व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए उचित कार्रवाई नहीं करने के लिए राज्‍य प्रशासन की आलोचना की। गवर्नर ने कहा- पुलिस सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं से डरी हुई है। टीएमसी के चारों नेताओं की जमानत रद्द करने की मांग करते हुए सीबीआई ने कलकत्ता हाईकोर्ट में कहा, इस स्थिति में जब नारदा आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हंगामा भड़क उठा, नारदा केस की जांच बंगाल में संभव नहीं है।

source : opera news

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