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एग्जिट पोल देख कर खुश न हो,कइयों बार खुश कर किया है नाराज

एग्जिट पोल देखते हो यह लोग एक सवाल पूछते हैं कि क्या एग्जिट पोल के नतीजे सही होते हैं ? जानकार मानते हैं कि जरूरी नहीं कि एग्जिट पोल के नतीजे हमेशा सही ही हो. एग्जिट पोल का मुख्य मकसद चुनाव के बाद नई सरकार को लेकर लोगों के अंदर पैदा हुई उत्सुकता शांत करना होता है. पुराने एग्जिट पोल के नतीजों पर नजर डालने पर दो तथ्य सामने आते हैं. कई बार ऐसे एग्जिट पोल सच होते हैं तो कई बार सच बताने से चूक भी जाते हैं. अगर बात 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव की ही करें तो एग्जिट पोल के नतीजों ने मतदाताओं को काफी निराश किया था.

अधिसंख्य सर्वे में कहा गया था कि एनडीए की सरकार बनने वाली है लेकिन बन गई महागठबंधन की सिर्फ बिहार ही नहीं उस दौरान तमिलनाडु में हुए चुनाव में सत्ताधारी ए आई ए डी एम को सत्ता से बाहर होते दिखाया गया. एग्जिट पोल के नतीजे बता रहे थे कि तमिलनाडु में डीएमके कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है पर जब चुनाव के नतीजे आए तो प्रदेश में वापस ए आई ए डी एम की सरकार बनी तमिलनाडु की जनता ने पहली बार किसी पार्टी को दोबारा सत्ता सौंपी बिहार तमिलनाडु में ऐसे एग्जिट पोल फेल होते दिखे तो 2016 में पश्चिम बंगाल में अलग-अलग एजेंसियों ने एग्जिट पोल में ममता बनर्जी की सरकार बनती बताएं और ये नतीजे सही साबित हुए
बरहाल आज बिहार में राजनीतिक दलों और उनके प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद कर दी है.

इसके साथ ही नाम तमाम न्यूज़ चैनल पर एग्जिट पोल का दौर भी शुरू हो चुका है यह एग्जिट पोल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कितने सटीक नतीजे दे पाए यह तो 10 नवंबर को ही पता चल पाएगा

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